गणेश उत्सव का प्रारंभ भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है, जो इस वर्ष 7 सितंबर 2024 को मनाया जाएगा। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना और पूजा का विशेष महत्व होता है। पुणे के प्रसिद्ध वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ श्री आचार्य विनय शास्त्री जी के अनुसार, इस दिन की पूजा और अनुष्ठान विधि विशेष रूप से सावधानीपूर्वक और शास्त्रोक्त तरीके से करने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं।
गणेश चतुर्थी की पूजा विधि:
1. गणेशजी की मूर्ति की स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें और उत्तर दिशा में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा को भगवान गणेश का प्रिय स्थान माना जाता है, इसलिए मूर्ति की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए।
स्थापना से पहले, जहां मूर्ति रखनी है उस स्थान पर स्वास्तिक बनाएं और उस पर पुष्प और अक्षत अर्पित करें। फिर भगवान गणेश की मूर्ति को विधिपूर्वक वहां स्थापित करें। गणेशजी का लाल वस्त्रों से श्रृंगार करें क्योंकि उन्हें लाल रंग अत्यधिक प्रिय है।
2. कलश स्थापना
गणेशजी की मूर्ति के साथ कलश की स्थापना भी करें। कलश में गंगाजल भरें और उसमें कुछ पत्ते, सुपारी, और चावल डालें। इस कलश को पूर्व दिशा में रखें क्योंकि यह दिशा शुभ मानी जाती है।
3. पूजा सामग्री और मंत्र
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री तैयार करें:
लाल फूल (गणेशजी को प्रिय)
धूप, दीपक, नैवेद्य
मोदक या लड्डू का भोग
चंदन, अक्षत, सुपारी
पंचामृत
पूजा करते समय निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें:
'ॐ गण गणपतये नमः' - इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
'विघ्नानि नाशायान्तु सर्वाणि सुरनायक। कार्य में सिद्धिमायातु पूजिते त्वयि धातरि।' - इस मंत्र का जप कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए करें।
4. गणेशजी को भोग और आरती
पूजा के अंत में भगवान गणेश को 21 मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें। मोदक को भगवान गणेश का प्रिय मिष्ठान माना जाता है। भोग के बाद घी का दीपक जलाएं और भगवान गणेश की आरती करें। आरती के समय पूरे परिवार को एकत्रित होकर भगवान का स्मरण करना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
5. व्रत और संकल्प
गणेश चतुर्थी के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व होता है। व्रत के दौरान आप फलाहार कर सकते हैं, और भगवान गणेश से जीवन की बाधाओं को दूर करने का संकल्प लें। संकल्प लेने के लिए, हाथ में चावल और पुष्प लेकर इस मंत्र का उच्चारण करें:
'मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायकपूजनमहं करिष्ये'
6. गृह में सुख-समृद्धि के लिए
श्री आचार्य विनय शास्त्री जी के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन सुहागिन महिलाओं को गुड़, घी, और मालपुआ का दान अपने सास-ससुर या माता को करना चाहिए। इस विधि से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और परिवार में समृद्धि आती है।
पूजा के दौरान शुद्धता का विशेष ख्याल रखें।
भगवान गणेश को लाल वस्त्र, लाल फूल, और लाल चंदन अर्पित करें।
पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शुद्ध और ताजगी से भरी होनी चाहिए।
गणेश चतुर्थी की पूजा विधि को सही तरीके से पालन करके भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन से सभी विघ्नों को दूर करें। पुणे के प्रसिद्ध वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ श्री आचार्य विनय शास्त्री जी से अधिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए आप उनसे संपर्क कर सकते हैं +91 8329790456 पर।